Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.17.28: उसी समय वहाँ बैठे हुए ऋषि की गोद में एक आम का फल गिर पड़ा। वह न तो वायु के कारण गिरा था, न ही किसी तोते ने उसमें चोंच मारी थी॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 2.17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.17.28 
तस्योपविष्टस्य मुनेरुत्सङ्गे निपपात ह।
अवातमशुकादष्टमेकमाम्रफलं किल॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उसी समय वहाँ बैठे हुए ऋषि की गोद में एक आम का फल गिर पड़ा। वह न तो वायु के कारण गिरा था, न ही किसी तोते ने उसमें चोंच मारी थी॥ 28॥
 
At that very moment a mango fruit fell in the lap of the sage sitting there. It had neither fallen due to the wind nor had any parrot pricked its beak in the fruit.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)