Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.17.26: राजा ने कहा- हे प्रभु! मैं अब राज्य छोड़कर तपस्यारूपी वन की ओर जा रहा हूँ। मुझ अभागे और पुत्रहीन को वरदान या राज्य की क्या आवश्यकता है?॥26॥ | mahabharat अध्याय 2.17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा ने कहा- हे प्रभु! मैं अब राज्य छोड़कर तपस्यारूपी वन की ओर जा रहा हूँ। मुझ अभागे और पुत्रहीन को वरदान या राज्य की क्या आवश्यकता है?॥26॥
The king said- O Lord! I have now left the kingdom and am heading towards the forest of penance. What need do I, an unfortunate and childless person, have of a boon or a kingdom?॥26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥