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mahabharat 2.17.15: वह तेज में सूर्य के समान, क्षमा में पृथ्वी के समान, क्रोध में यमराज के समान और धन में कुबेर के समान था॥15॥   |   mahabharat अध्याय 2.17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.17.15 
तेजसा सूर्यसंकाश: क्षमया पृथिवीसम:।
यमान्तकसम: क्रोधे श्रिया वैश्रवणोपम:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वह तेज में सूर्य के समान, क्षमा में पृथ्वी के समान, क्रोध में यमराज के समान और धन में कुबेर के समान था॥15॥
 
He was like the Sun in brilliance, like the Earth in forgiveness, like Yamaraja in anger and like Kubera in wealth.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)