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mahabharat 2.15.18: परन्तु हे भरत! तुम्हें यह जान लेना चाहिए कि बृहद्रथ का पुत्र जरासंध तुम्हारे मार्ग में बाधक है। क्षत्रियों के सौ कुल कभी उसका अनुसरण नहीं करते, इसलिए वह बलपूर्वक अपना साम्राज्य स्थापित कर रहा है॥18॥   |   mahabharat अध्याय 2.15: जरासंधके विषयमें राजा युधिष्ठिर, भीम और श्रीकृष्णकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 15: जरासंधके विषयमें राजा युधिष्ठिर, भीम और श्रीकृष्णकी बातचीत  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.15.18 
बार्हद्रथो जरासंधस्तद् विद्धि भरतर्षभ।
न चैनमनुरुद्धॺन्ते कुलान्येकशतं नृपा:।
तस्मादिह बलादेव साम्राज्यं कुरुते हि स:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
परन्तु हे भरत! तुम्हें यह जान लेना चाहिए कि बृहद्रथ का पुत्र जरासंध तुम्हारे मार्ग में बाधक है। क्षत्रियों के सौ कुल कभी उसका अनुसरण नहीं करते, इसलिए वह बलपूर्वक अपना साम्राज्य स्थापित कर रहा है॥18॥
 
But, dear Bharata, you should know that Brihadratha's son Jarasandha is an obstacle in your path. The hundred clans of Kshatriyas never follow him, so he is establishing his empire by force.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)