श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 15: जरासंधके विषयमें राजा युधिष्ठिर, भीम और श्रीकृष्णकी बातचीत  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.15.12 
अतन्द्रितश्च प्रायेण दुर्बलो बलिनं रिपुम्।
जयेत् सम्यक् प्रयोगेण नीत्यार्थानात्मनो हितान्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तथापि जो आलस्य त्यागकर उत्तम युक्ति और नीति से काम लेता है, वह दुर्बल होते हुए भी बलवान शत्रु को जीत लेता है और अपने लिए हितकर एवं इच्छित अर्थ प्राप्त कर लेता है ॥12॥
 
However, he who abandons laziness and acts with good strategy and policy, in spite of being weak, conquers a strong enemy and obtains the beneficial and desired meaning for himself. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)