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mahabharat 2.14.35: इससे कंस का भय तो दूर हो गया; परन्तु जरासन्ध क्रोधित होकर हमसे बदला लेने को उद्यत हो गया। हे राजन! उस समय भोजवंश के अठारह कुलों (मंत्री-पुरोहित आदि) ने आपस में इस प्रकार विचार-विमर्श किया -॥35॥   |   mahabharat अध्याय 2.14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.14.35 
भये तु समतिक्रान्ते जरासंधे समुद्यते।
मन्त्रोऽयं मन्त्रितो राजन् कुलैरष्टादशावरै:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
इससे कंस का भय तो दूर हो गया; परन्तु जरासन्ध क्रोधित होकर हमसे बदला लेने को उद्यत हो गया। हे राजन! उस समय भोजवंश के अठारह कुलों (मंत्री-पुरोहित आदि) ने आपस में इस प्रकार विचार-विमर्श किया -॥35॥
 
This did remove Kansa's fear; but Jarasandha became angry and was ready to take revenge on us. O King! At that time eighteen clans of Bhoj dynasty (ministers-priests etc.) discussed together in this manner -॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)