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mahabharat 2.14.33-34: फिर मैंने आहुक की पुत्री सुतनुका का विवाह अक्रूर से कराया और बलराम को अपना साथी बनाकर अपने कुल-बंधुओं का कार्य पूर्ण किया। बलराम और मैंने कंस और सुनामा का वध किया।   |   mahabharat अध्याय 2.14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  2.14.33-34 
दत्त्वाक्रूराय सुतनुं तामाहुकसुतां तदा॥ ३३॥
संकर्षणद्वितीयेन ज्ञातिकार्यं मया कृतम्।
हतौ कंससुनामानौ मया रामेण चाप्युत॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
फिर मैंने आहुक की पुत्री सुतनुका का विवाह अक्रूर से कराया और बलराम को अपना साथी बनाकर अपने कुल-बंधुओं का कार्य पूर्ण किया। बलराम और मैंने कंस और सुनामा का वध किया।
 
Then I got Aahuk's daughter Sutanuka married to Akrura and by taking Balarama as my companion I accomplished the task of my caste brothers. Balarama and I killed Kansa and Sunama.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)