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mahabharat 2.14.1: श्रीकृष्ण बोले - महाराज ! आपमें सभी सद्गुण विद्यमान हैं, अतः आप राजसूय यज्ञ करने के योग्य हैं। भरत ! आप सब कुछ जानते हैं, फिर भी आपके पूछने पर मुझे इस विषय में कुछ कहना है ॥1॥   |   mahabharat अध्याय 2.14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.14.1 
श्रीकृष्ण उवाच
सर्वैर्गुणैर्महाराज राजसूयं त्वमर्हसि।
जानतस्त्वेव ते सर्वं किंचिद् वक्ष्यामि भारत॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले - महाराज ! आपमें सभी सद्गुण विद्यमान हैं, अतः आप राजसूय यज्ञ करने के योग्य हैं। भरत ! आप सब कुछ जानते हैं, फिर भी आपके पूछने पर मुझे इस विषय में कुछ कहना है ॥1॥
 
Shri Krishna said - Maharaj! You have all the good qualities; therefore you are eligible to perform the Rajasuya Yagya. Bharat! You know everything, yet on your asking I have to tell you something about this matter. ॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)