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mahabharat 2.13.38: देवताओं द्वारा पूजित श्रीकृष्ण के असाधारण कार्यों से पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर ने यह अनुमान लगाया कि श्रीकृष्ण से कुछ भी अज्ञात नहीं है और ऐसा कोई कार्य नहीं है जिसे वे न कर सकें ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 2.13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.13.38 
पाण्डवस्तर्कयामास कर्मभिर्देवसम्मतै:।
नास्य किंचिदविज्ञातं नास्य किंचिदकर्मजम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
देवताओं द्वारा पूजित श्रीकृष्ण के असाधारण कार्यों से पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर ने यह अनुमान लगाया कि श्रीकृष्ण से कुछ भी अज्ञात नहीं है और ऐसा कोई कार्य नहीं है जिसे वे न कर सकें ॥38॥
 
Yudhishthira, the son of Pandu, inferred from Sri Krishna's extraordinary deeds, worshipped by the gods, that nothing is unknown to Sri Krishna and there is no task that He cannot perform. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)