Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.13.23: 'उस यज्ञ का समय क्षत्रसम्पति अर्थात् सेना आदि के अधीन है। उसमें उत्तम व्रत का पालन करने वाले ब्राह्मण सामवेद के मन्त्रों का उच्चारण करके अग्नि की स्थापना के लिए छः अग्निवेदियों का निर्माण करते हैं। 23॥   |   mahabharat अध्याय 2.13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.13.23 
तस्य यज्ञस्य समय: स्वाधीन: क्षत्रसम्पदा।
साम्ना षडग्नयो यस्मिंश्चीयन्ते शंसितव्रतै:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'उस यज्ञ का समय क्षत्रसम्पति अर्थात् सेना आदि के अधीन है। उसमें उत्तम व्रत का पालन करने वाले ब्राह्मण सामवेद के मन्त्रों का उच्चारण करके अग्नि की स्थापना के लिए छः अग्निवेदियों का निर्माण करते हैं। 23॥
 
'The time of that Yagya is under the control of Kshatrasampatti i.e. army etc. In that, the Brahmins who observe the best fast build six fire altars for the establishment of fire by chanting the mantras of Samveda. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)