Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.13.14-15h: डाकू, ठग, राजा या राजा के कृपापात्रों से प्रजा के प्रति क्रूरता या बेईमानी का व्यवहार कभी नहीं सुना गया और प्रजा आपस में भी कभी एक दूसरे के साथ बेईमानी का व्यवहार नहीं करती थी ॥14 1/2॥ | mahabharat अध्याय 2.13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दस्युभ्यो वञ्चकेभ्यश्च राज्ञ: प्रति परस्परम्॥ १४॥
राजवल्लभतश्चैव नाश्रूयत मृषा कृतम्।
अनुवाद
डाकू, ठग, राजा या राजा के कृपापात्रों से प्रजा के प्रति क्रूरता या बेईमानी का व्यवहार कभी नहीं सुना गया और प्रजा आपस में भी कभी एक दूसरे के साथ बेईमानी का व्यवहार नहीं करती थी ॥14 1/2॥
Cruelty or dishonest behaviour towards the subjects was never heard of from robbers, thugs, the king or the king's favourites and even among themselves the subjects never behaved dishonestly with one another. ॥ 14 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥