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mahabharat 2.12.31: राजा! इन सब बातों पर विचार करो और जो तुम्हें हितकर लगे, वही करो। चारों वर्णों की रक्षा के लिए सदैव सतर्क और तत्पर रहो।   |   mahabharat अध्याय 2.12: राजा हरिश्चन्द्रका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके प्रति राजा पाण्डुका संदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 12: राजा हरिश्चन्द्रका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके प्रति राजा पाण्डुका संदेश  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.12.31 
एतत् संचिन्त्य राजेन्द्र यत् क्षेमं तत् समाचर।
अप्रमत्तोत्थितो नित्यं चातुर्वर्ण्यस्य रक्षणे॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
राजा! इन सब बातों पर विचार करो और जो तुम्हें हितकर लगे, वही करो। चारों वर्णों की रक्षा के लिए सदैव सतर्क और तत्पर रहो।
 
King! Think about all this and do what seems to be beneficial to you. Always be cautious and prepared to protect the four castes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)