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mahabharat 2.12.25: 'भरत! तुम्हारे भाई तुम्हारे अधीन हैं, तुम सम्पूर्ण पृथ्वी को जीतने में समर्थ हो; इसलिए राजसूय नामक महान यज्ञ करो॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 2.12: राजा हरिश्चन्द्रका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके प्रति राजा पाण्डुका संदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.12.25 
समर्थोऽसि महीं जेतुं भ्रातरस्ते स्थिता वशे।
राजसूयं क्रतुश्रेष्ठमाहरस्वेति भारत॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'भरत! तुम्हारे भाई तुम्हारे अधीन हैं, तुम सम्पूर्ण पृथ्वी को जीतने में समर्थ हो; इसलिए राजसूय नामक महान यज्ञ करो॥ 25॥
 
'Bharata! Your brothers are under your command, you are capable of conquering the entire earth; therefore perform the great sacrifice called Rajasuya.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)