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ये चापि निधनं प्राप्ता: संग्रामेष्वपलायिन:।
ते तत् सदनमासाद्य मोदन्ते भरतर्षभ॥ २१॥
अनुवाद
हे भारत! जो लोग युद्ध में पीठ नहीं दिखाते और वहीं मृत्यु को वरण करते हैं, वे भी देवराज इन्द्र के दरबार में जाकर वहाँ सुख भोगते हैं।
O Bharata! Those who do not turn their backs in the battle and choose death there itself, they too go to the court of the king of gods Indra and enjoy the pleasures there.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥