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mahabharat 2.12.18: राजन! भरतश्रेष्ठ! यही कारण है कि महाराज हरिश्चंद्र उन हजारों राजाओं की अपेक्षा इन्द्र की सभा में अधिक आदरपूर्वक विराजमान होते हैं - यह आप भली-भाँति जान लीजिए॥18॥   |   mahabharat अध्याय 2.12: राजा हरिश्चन्द्रका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके प्रति राजा पाण्डुका संदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 12: राजा हरिश्चन्द्रका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके प्रति राजा पाण्डुका संदेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.12.18 
एतस्मात् कारणाद् राजन् हरिश्चन्द्रो विराजते।
तेभ्यो राजसहस्रेभ्यस्तद् विद्धि भरतर्षभ॥ १८॥
 
 
अनुवाद
राजन! भरतश्रेष्ठ! यही कारण है कि महाराज हरिश्चंद्र उन हजारों राजाओं की अपेक्षा इन्द्र की सभा में अधिक आदरपूर्वक विराजमान होते हैं - यह आप भली-भाँति जान लीजिए॥18॥
 
Rajan! Bharatshrestha! This is the reason why Maharaj Harishchandra sits more respectfully in Indra's court than those thousands of kings - you should know this very well. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)