श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 11: ब्रह्माजीकी सभाका वर्णन  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  2.11.62 
एता मया दृष्टपूर्वा: सभा देवेषु भारत।
सभेयं मानुषे लोके सर्वश्रेष्ठतमा तव॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! मैंने प्राचीन काल से ही स्वर्ग में ये सब सभाएँ देखी हैं। मनुष्य लोक में तुम्हारी यह सभा सर्वश्रेष्ठ है।॥62॥
 
O Bharata! I have seen all these assemblies in the heavens since ancient times. In the human world, this assembly of yours is the best. ॥ 62॥
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि लोकपालसभाख्यानपर्वणि ब्रह्मसभावर्णनं नामैकादशोऽध्याय:॥ ११॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत लोकपालसभाख्यानपर्वमें ब्रह्मसभा-वर्णन नामक ग्यारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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