vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 11: ब्रह्माजीकी सभाका वर्णन
»
श्लोक 18
श्लोक
2.11.18
उपतिष्ठन्ति चाप्येनं प्रजानां पतय: प्रभुम्।
दक्ष: प्रचेता: पुलहो मरीचि: कश्यप: प्रभु:॥ १८॥
अनुवाद
भारत वहाँ दक्ष और अन्य प्रजापति भगवान ब्रह्मा की सेवा में उपस्थित हैं। दक्ष, प्रचेता, पुलह, मरीचि, प्रभावशाली कश्यप,॥ 18॥
India There Daksh and other Prajapatis are present in the service of Lord Brahma. Daksh, Pracheta, Pulah, Marichi, influential Kashyap,॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×