श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 11: ब्रह्माजीकी सभाका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.11.1 
नारद उवाच
पितामहसभां तात कथ्यमानां निबोध मे।
शक्यते या न निर्देष्टुमेवंरूपेति भारत॥ १॥
 
 
अनुवाद
नारदजी कहते हैं - हे भरत! अब मेरे द्वारा कहे गए पितामह ब्रह्माजी की सभा का वर्णन सुनो। वह सभा ऐसी है कि उसका इस रूप में वर्णन नहीं किया जा सकता।॥1॥
 
Naradji says - Dear Bharata! Now listen to the description of the assembly of Grandfather Brahmaji told by me. That assembly is such that it cannot be described in this form. ॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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