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mahabharat 2.10.40: हे राजन! मैंने अपनी आँखों से आकाश में विचरण करने वाले कुबेर के सुन्दर दरबार को देखा है। अब मैं ब्रह्माजी के दरबार का वर्णन करूँगा; उसे सुनो॥40॥   |   mahabharat अध्याय 2.10: कुबेरकी सभाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 10: कुबेरकी सभाका वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.10.40 
सा सभा तादृशी रम्या मया दृष्टान्तरिक्षगा।
पितामहसभां राजन् कीर्तयिष्ये निबोध ताम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैंने अपनी आँखों से आकाश में विचरण करने वाले कुबेर के सुन्दर दरबार को देखा है। अब मैं ब्रह्माजी के दरबार का वर्णन करूँगा; उसे सुनो॥40॥
 
O King! I have seen with my own eyes the beautiful court of Kubera which roams in the sky. Now I will describe the court of Brahmaji; listen to it. ॥ 40॥
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि लोकपालसभाख्यानपर्वणि धनदसभावर्णनं नाम दशमोऽध्याय:॥ १०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत लोकपालसभाख्यानपर्वमें कुबेरसभा-वर्णन नामक दसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)