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mahabharat 2.1.2: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! खाण्डवध के बाद मयासुर ने भगवान श्रीकृष्ण के पास बैठे हुए अर्जुन की बार-बार स्तुति की और हाथ जोड़कर मधुर वाणी में उनसे कहा॥2॥   |   mahabharat अध्याय 2.1: भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञाके अनुसार मयासुरद्वारा सभाभवन बनानेकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.1.2 
वैशम्पायन उवाच
ततोऽब्रवीन्मय: पार्थं वासुदेवस्य संनिधौ।
प्राञ्जलि: श्लक्ष्णया वाचा पूजयित्वा पुन: पुन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! खाण्डवध के बाद मयासुर ने भगवान श्रीकृष्ण के पास बैठे हुए अर्जुन की बार-बार स्तुति की और हाथ जोड़कर मधुर वाणी में उनसे कहा॥2॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! After Khandavadah, Mayasur repeatedly praised Arjuna sitting near Lord Krishna and said to him with folded hands in a sweet voice. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)