रत्यर्थं भवतां ह्येषा निर्मिता शूलपाणिना।
द्रुपदस्य कुले जाता भवद्भिश्चोपजीविता॥ १३॥
अनुवाद
भगवान शंकर ने स्वयं ही तुम्हारी प्रसन्नता के लिए इन्हें प्रकट किया था और ये ही द्रुपद के कुल में जन्म लेकर तुम सब भाइयों के द्वारा कृतार्थ हुई थीं।
Lord Shankar himself had manifested her for your happiness and it was she who, after being born in the family of Drupada, was blessed by all of you brothers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥