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mahabharat 18.2.49: राजा युधिष्ठिर शोक और शोक से व्याकुल होकर अनेक प्रकार की बातें सोचने लगे। उस समय उनकी समस्त इन्द्रियाँ चिन्ता से व्याकुल हो उठीं।   |   mahabharat अध्याय 18.2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  18.2.49 
एवं बहुविधं राजा विममर्श युधिष्ठिर:।
दु:खशोकसमाविष्टश्चिन्ताव्याकुलितेन्द्रिय:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
राजा युधिष्ठिर शोक और शोक से व्याकुल होकर अनेक प्रकार की बातें सोचने लगे। उस समय उनकी समस्त इन्द्रियाँ चिन्ता से व्याकुल हो उठीं।
 
King Yudhishthira, overcome with grief and sorrow, began to think of many things. At that time all his senses were agitated with worry.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)