Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 18.2.45: धृतराष्ट्रपुत्र राजा सुयोधन ने ऐसा कौन सा पुण्यकर्म किया है कि उसे अपने समस्त पापी सेवकों सहित ऐसा अद्भुत वैभव और धन प्राप्त हुआ है?॥ 45॥ | mahabharat अध्याय 18.2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना । mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
किं कृत्वा धृतराष्ट्रस्य पुत्रो राजा सुयोधन:।
तथा श्रिया युत: पापै: सह सर्वै: पदानुगै:॥ ४५॥
अनुवाद
धृतराष्ट्रपुत्र राजा सुयोधन ने ऐसा कौन सा पुण्यकर्म किया है कि उसे अपने समस्त पापी सेवकों सहित ऐसा अद्भुत वैभव और धन प्राप्त हुआ है?॥ 45॥
What pious deed has King Suyodhana, the son of Dhritarashtra, performed to be blessed with such wonderful splendor and wealth, along with all his sinful servants?॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥