श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  18.2.39 
अबुध्यमानस्ता वाचो धर्मपुत्रो युधिष्ठिर:।
उवाच के भवन्तो वै किमर्थमिह तिष्ठथ॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
उनकी बातें पूरी तरह न समझ पाने पर धर्मपुत्र युधिष्ठिर ने पूछा, 'आप कौन हैं और यहां क्यों रहते हैं?'
 
Not fully understanding their words, Yudhishthira, the son of Dharma, asked, 'Who are you and why do you live here?'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)