Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 18.2.38: जब वही करुण शब्द, जो उसने पहले महान् दुःख और पीड़ा से पीड़ित लोगों से सुने थे, सामने से बार-बार उसके कानों में पड़े, तो भी पाण्डुपुत्र उन्हें पहचान न सका। 38. | mahabharat अध्याय 18.2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना । mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स ता गिर: पुरस्ताद् वै श्रुतपूर्वा पुन: पुन:।
ग्लानानां दु:खितानां च नाभ्यजानत पाण्डव:॥ ३८॥
अनुवाद
जब वही करुण शब्द, जो उसने पहले महान् दुःख और पीड़ा से पीड़ित लोगों से सुने थे, सामने से बार-बार उसके कानों में पड़े, तो भी पाण्डुपुत्र उन्हें पहचान न सका। 38.
When the same pitiful words that he had heard earlier from people suffering great pain and suffering came to his ears again and again from the front, yet the son of Pandu was unable to recognize them. 38.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥