श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  18.2.19 
अस्थिकेशसमाकीर्णं कृमिकीटसमाकुलम्।
ज्वलनेन प्रदीप्तेन समन्तात् परिवेष्टितम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हड्डियाँ और बाल हर जगह बिखरे पड़े थे। रास्ता कीड़ों-मकोड़ों से भरा था। चारों तरफ़ से जलती हुई आग ने उसे घेर रखा था।
 
Bones and hair were scattered everywhere. The path was full of worms and insects. It was surrounded by burning fire from all sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)