Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 18.2.10-11: मैं अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय, अपने भयंकर पराक्रमी भाई भीमसेन, इन्द्र के समान तेजस्वी अर्जुन, नकुल और सहदेव, यमराज के समान अजेय तथा पतिव्रता द्रौपदी को देखना चाहता हूँ। यहाँ रहने की मेरी तनिक भी इच्छा नहीं है। मैं यह सब सत्य तुमसे कह रहा हूँ॥10-11॥   |   mahabharat अध्याय 18.2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  18.2.10-11 
भीमं च भीमविक्रान्तं प्राणेभ्योऽपि प्रियं मम।
अर्जुनं चेन्द्रसंकाशं यमौ चैव यमोपमौ॥ १०॥
द्रष्टुमिच्छामि तां चाहं पाञ्चालीं धर्मचारिणीम्।
न चेह स्थातुमिच्छामि सत्यमेवं ब्रवीमि व:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
मैं अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय, अपने भयंकर पराक्रमी भाई भीमसेन, इन्द्र के समान तेजस्वी अर्जुन, नकुल और सहदेव, यमराज के समान अजेय तथा पतिव्रता द्रौपदी को देखना चाहता हूँ। यहाँ रहने की मेरी तनिक भी इच्छा नहीं है। मैं यह सब सत्य तुमसे कह रहा हूँ॥10-11॥
 
I want to see my fierce and valiant brother Bhimasena, who is dearer to me than my life, Arjuna, who is as radiant as Indra, Nakula and Sahadeva, who are invincible like Yamaraja, and the virtuous Draupadi. ​​I do not have the slightest desire to stay here. I am telling you all this truth.॥10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)