vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व
»
अध्याय 1: स्वर्गमें नारद और युधिष्ठिरकी बातचीत
»
श्लोक 2
श्लोक
18.1.2
एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं सर्वविच्चासि मे मत:।
महर्षिणाभ्यनुज्ञातो व्यासेनाद्भुतकर्मणा॥ २॥
अनुवाद
मैं यह सब सुनना चाहता हूँ। मैं मानता हूँ कि आप अद्भुत महर्षि व्यास की आज्ञा पाकर अन्तर्यामी हो गए हैं॥ 2॥
I wish to hear all this. I believe that you have become omniscient after receiving the permission of the wonderful sage Vyasa.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×