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mahabharat 17.3.5: इन्द्र ने कहा, "भरतश्रेष्ठ! आपके सभी भाई आपसे पहले ही स्वर्ग पहुँच चुके हैं। द्रौपदी भी उनके साथ है। वहाँ जाकर आप उन सभी से मिलेंगे।" ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 17.3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व  »  अध्याय 3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  17.3.5 
शक्र उवाच
भ्रातॄन् द्रक्ष्यसि स्वर्गे त्वमग्रतस्त्रिदिवं गतान्।
कृष्णया सहितान् सर्वान् मा शुचो भरतर्षभ॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने कहा, "भरतश्रेष्ठ! आपके सभी भाई आपसे पहले ही स्वर्ग पहुँच चुके हैं। द्रौपदी भी उनके साथ है। वहाँ जाकर आप उन सभी से मिलेंगे।" ॥5॥
 
Indra said, "Best of Bharatas! All your brothers have already reached heaven before you. Draupadi is also with them. You will meet them all when you go there." ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)