Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 17.3.37-38: हे दैत्यसूदन! मुझे अपने भाइयों के बिना यहाँ रहने में रुचि नहीं है; इसलिए मैं वहाँ जाना चाहता हूँ जहाँ मेरे भाई गए हैं और जहाँ मेरी द्रौपदी गई है, जो लम्बी, श्यामवर्णी, बुद्धिमान, सत्वगुण से युक्त और युवतियों में श्रेष्ठ है। | mahabharat अध्याय 17.3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना । mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे दैत्यसूदन! मुझे अपने भाइयों के बिना यहाँ रहने में रुचि नहीं है; इसलिए मैं वहाँ जाना चाहता हूँ जहाँ मेरे भाई गए हैं और जहाँ मेरी द्रौपदी गई है, जो लम्बी, श्यामवर्णी, बुद्धिमान, सत्वगुण से युक्त और युवतियों में श्रेष्ठ है।
‘O Daityasudana! I do not feel like staying here without my brothers; therefore I wish to go there where my brothers have gone and where my Draupadi, who is tall, dark-skinned, intelligent, endowed with Sattva Gunas and the best among young women, has gone. 37-38.
इति श्रीमहाभारते महाप्रस्थानिके पर्वणि युधिष्ठिरस्वर्गारोहे तृतीयोऽध्याय:॥ ३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत महाप्रस्थानिकपर्वमें युधिष्ठिरका स्वर्गारोहणविषयक तीसरा अध्याय पूरा हुआ॥ ३॥
॥ महाप्रस्थानिकपर्व सम्पूर्ण॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥