Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 17.3.22: हे भारतश्रेष्ठ! इसी कारण तुमने इसी शरीर से अनन्त लोकों को प्राप्त किया है। तुमने परम उत्तम दिव्य गति प्राप्त की है। 22॥   |   mahabharat अध्याय 17.3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व  »  अध्याय 3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  17.3.22 
अतस्तवाक्षया लोका: स्वशरीरेण भारत।
प्राप्तोऽसि भरतश्रेष्ठ दिव्यां गतिमनुत्तमाम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे भारतश्रेष्ठ! इसी कारण तुमने इसी शरीर से अनन्त लोकों को प्राप्त किया है। तुमने परम उत्तम दिव्य गति प्राप्त की है। 22॥
 
India Bharatshrestha! This is the reason why you have attained the eternal worlds from this very body. You have attained the most perfect divine movement. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)