vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व
»
अध्याय 2: मार्गमें द्रौपदी, सहदेव, नकुल, अर्जुन और भीमसेनका गिरना तथा युधिष्ठिरद्वारा प्रत्येकके गिरनेका कारण बताया जाना
»
श्लोक 10
श्लोक
17.2.10
युधिष्ठिर उवाच
आत्मन: सदृशं प्राज्ञं नैषोऽमन्यत कंचन।
तेन दोषेण पतितस्तस्मादेष नृपात्मज:॥ १०॥
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले: इस राजकुमार सहदेव ने अपने समान किसी को विद्वान या बुद्धिमान नहीं समझा; इसी दोष के कारण उसका पतन हुआ है॥ 10॥
Yudhishthira said: This prince Sahadev did not consider anyone as learned or intelligent as himself; hence, this fault has caused his downfall.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×