Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 16.8.d2h-23: निर्वेद ने मेरे मन को भर दिया है। मुझे शांति नहीं मिल रही है। मैं दिव्य स्वरूप, अजन्मा, भगवान देवकीनन्दन वासुदेव वीर जनार्दन के बिना अब और नहीं जीना चाहता हूँ। 23॥ | mahabharat अध्याय 16.8: अर्जुन और व्यासजीकी बातचीत । mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निर्वेद ने मेरे मन को भर दिया है। मुझे शांति नहीं मिल रही है। मैं दिव्य स्वरूप, अजन्मा, भगवान देवकीनन्दन वासुदेव वीर जनार्दन के बिना अब और नहीं जीना चाहता हूँ। 23॥
Nirveda has filled my mind. I can't find peace. I do not want to live anymore without the divine form, the unborn, Lord Devkinandan Vasudev Veer Janardan. 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥