श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  16.7.9 
तान् दीनमनस: सर्वान् विमूढान् गतचेतस:।
उवाचेदं वच: काले पार्थो दीनतरस्तथा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
सभी में लाचारी छा गई। सभी हतप्रभ और अचेत थे। अर्जुन की हालत तो और भी दयनीय थी। उसने सभा के सदस्यों से उचित शब्द कहे।
 
There was a feeling of helplessness in all of them. Everyone was confused and losing consciousness. Arjuna's condition was even more pitiable. He spoke the appropriate words to those members of the assembly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)