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mahabharat 16.7.60: तब कुन्तीपुत्र अर्जुन क्रोधित हो उठे और हजारों वृष्णि सैनिकों के साथ अपने गाण्डीव धनुष से छोड़े गए बाणों से उन लुटेरों का वध करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 16.7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  16.7.60 
ततो गाण्डीवनिर्मुक्तै: शरै: पार्थो धनंजय:।
जधान दस्यून् सोद्वेगो वृष्णिभृत्यै: सहस्रश:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
तब कुन्तीपुत्र अर्जुन क्रोधित हो उठे और हजारों वृष्णि सैनिकों के साथ अपने गाण्डीव धनुष से छोड़े गए बाणों से उन लुटेरों का वध करने लगे।
 
Then Arjuna, the son of Kunti, became agitated and along with thousands of Vrishni soldiers, began killing those robbers with arrows shot from his Gandiva bow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)