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mahabharat 16.7.53: जब वीर अर्जुन ने यह कहा तो मूर्ख अहीरों ने उनकी बात अनसुनी कर दी और उनकी बार-बार चेतावनी के बावजूद भीड़ पर हमला कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 16.7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  16.7.53 
तथोक्तास्तेन वीरेण कदर्थीकृत्य तद्वच:।
अभिपेतुर्जनं मूढा वार्यमाणा: पुन: पुन:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जब वीर अर्जुन ने यह कहा तो मूर्ख अहीरों ने उनकी बात अनसुनी कर दी और उनकी बार-बार चेतावनी के बावजूद भीड़ पर हमला कर दिया।
 
When the valiant Arjuna said this, the foolish Ahirs ignored his words and attacked the crowd in spite of his repeated warnings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)