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mahabharat 16.6.5-6h: वसुदेव बोले, "अर्जुन! मैं उन वीरों को नहीं देख पा रहा हूँ जिन्होंने सैकड़ों राक्षसों और राजाओं पर विजय प्राप्त की थी, फिर भी मैं मर नहीं पा रहा हूँ। ऐसा प्रतीत होता है कि मेरे लिए मृत्यु अत्यंत कठिन है।"   |   mahabharat अध्याय 16.6: द्वारकामें अर्जुन और वसुदेवजीकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 6: द्वारकामें अर्जुन और वसुदेवजीकी बातचीत  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  16.6.5-6h 
वसुदेव उवाच
यैर्जिता भूमिपालाश्च दैत्याश्च शतशोऽर्जुन॥ ५॥
तान् दृष्ट्वा नेह पश्यामि जीवाम्यर्जुन दुर्मर:।
 
 
अनुवाद
वसुदेव बोले, "अर्जुन! मैं उन वीरों को नहीं देख पा रहा हूँ जिन्होंने सैकड़ों राक्षसों और राजाओं पर विजय प्राप्त की थी, फिर भी मैं मर नहीं पा रहा हूँ। ऐसा प्रतीत होता है कि मेरे लिए मृत्यु अत्यंत कठिन है।"
 
Vasudev said, "Arjuna! I am not able to see those heroes who had conquered hundreds of demons and kings, even then I am not able to die. It seems that death is very difficult for me."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)