श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 6: द्वारकामें अर्जुन और वसुदेवजीकी बातचीत  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  16.6.21-22h 
योऽहं तमर्जुनं विद्धि योऽर्जुन: सोऽहमेव तु॥ २१॥
यद् ब्रूयात् तत् तथा कार्यमिति बुद्‍ध्यस्व माधव।
 
 
अनुवाद
मुझे अर्जुन ही समझो, जो अर्जुन है, वही मैं हूँ। माधव! तुम लोग अर्जुन जो कहे वैसा ही करो। इस बात को अच्छी तरह समझ लो। ॥21 1/2॥
 
Understand me as Arjuna, who Arjuna is, I am that. Madhava! You people should do whatever Arjuna says. Understand this thing well. ॥ 21 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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