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mahabharat 16.4.10: अब सुनो, मुझे क्या करना है। मैं वन में जाकर बलरामजी के साथ तपस्या करूँगा।’ ऐसा कहकर उसने अपने पिता के चरणों का स्पर्श किया। तब भगवान श्रीकृष्ण तुरन्त वहाँ से चले गए॥10॥   |   mahabharat अध्याय 16.4: दारुकका अर्जुनको सूचना देनेके लिये हस्तिनापुर जाना, बभ्रुका देहावसान एवं बलराम और श्रीकृष्णका परमधाम-गमन   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 4: दारुकका अर्जुनको सूचना देनेके लिये हस्तिनापुर जाना, बभ्रुका देहावसान एवं बलराम और श्रीकृष्णका परमधाम-गमन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  16.4.10 
तपश्चरिष्यामि निबोध तन्मे
रामेण सार्धं वनमभ्युपेत्य।
इतीदमुक्त्वा शिरसा च पादौ
संस्पृश्य कृष्णस्त्वरितो जगाम॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अब सुनो, मुझे क्या करना है। मैं वन में जाकर बलरामजी के साथ तपस्या करूँगा।’ ऐसा कहकर उसने अपने पिता के चरणों का स्पर्श किया। तब भगवान श्रीकृष्ण तुरन्त वहाँ से चले गए॥10॥
 
Now listen to what I have to do. I will go to the forest and do penance with Balarama.' Saying this, he touched his father's feet with his head. Then Lord Krishna immediately left from there.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)