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mahabharat 16.2.10: उन दिनों वृष्णि लोग खुलेआम पाप करते थे और उसमें लज्जा नहीं करते थे। यहाँ तक कि वे ब्राह्मणों, देवताओं और पितरों से भी द्वेष करने लगे थे॥10॥   |   mahabharat अध्याय 16.2: द्वारकामें भयंकर उत्पात देखकर भगवान‍् श्रीकृष्णका यदुवंशियोंको तीर्थयात्राके लिये आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 2: द्वारकामें भयंकर उत्पात देखकर भगवान‍् श्रीकृष्णका यदुवंशियोंको तीर्थयात्राके लिये आदेश देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  16.2.10 
नापत्रपन्त पापानि कुर्वन्तो वृष्णयस्तदा।
प्राद्विषन् ब्राह्मणांश्चापि पितॄन् देवांस्तथैव च॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उन दिनों वृष्णि लोग खुलेआम पाप करते थे और उसमें लज्जा नहीं करते थे। यहाँ तक कि वे ब्राह्मणों, देवताओं और पितरों से भी द्वेष करने लगे थे॥10॥
 
In those days the Vrishnis committed sins openly and were not ashamed of it. They even started hating the Brahmins, Gods and ancestors.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)