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mahabharat 16.1.5: चाँद और सूरज, दोनों के चारों ओर भयानक घेरे दिखाई दे रहे थे। उन घेरों में तीन रंग दिखाई दे रहे थे। उनके किनारे काले और सूखे थे। बीच में राख जैसा धूसर रंग दिखाई दे रहा था और भीतरी किनारे की चमक लाल दिखाई दे रही थी।   |   mahabharat अध्याय 16.1: युधिष्ठिरका अपशकुन देखना, यादवोंके विनाशका समाचार सुनना, द्वारकामें ऋषियोंके शापवश साम्बके पेटसे मूसलकी उत्पत्ति तथा मदिराके निषेधकी कठोर आज्ञा   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरका अपशकुन देखना, यादवोंके विनाशका समाचार सुनना, द्वारकामें ऋषियोंके शापवश साम्बके पेटसे मूसलकी उत्पत्ति तथा मदिराके निषेधकी कठोर आज्ञा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  16.1.5 
परिवेषाश्च दृश्यन्ते दारुणाश्चन्द्रसूर्ययो:।
त्रिवर्णि: श्यामरूक्षान्तास्तथा भस्मारुणप्रभा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
चाँद और सूरज, दोनों के चारों ओर भयानक घेरे दिखाई दे रहे थे। उन घेरों में तीन रंग दिखाई दे रहे थे। उनके किनारे काले और सूखे थे। बीच में राख जैसा धूसर रंग दिखाई दे रहा था और भीतरी किनारे की चमक लाल दिखाई दे रही थी।
 
Terrible circles were visible around both the moon and the sun. Three colours were visible in those circles. Their edges were black and dry. A grey colour like ash was visible in the middle and the glow of the inner edge was visible as red.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)