Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 16.1.4: महाराज! सौरमंडल धूल से ढका हुआ था। सूर्योदय के समय सूर्य प्रकाशहीन प्रतीत होता था और उसका गोला प्रतिदिन अनेक सिरहीन पिंडों से ढका हुआ प्रतीत होता था।   |   mahabharat अध्याय 16.1: युधिष्ठिरका अपशकुन देखना, यादवोंके विनाशका समाचार सुनना, द्वारकामें ऋषियोंके शापवश साम्बके पेटसे मूसलकी उत्पत्ति तथा मदिराके निषेधकी कठोर आज्ञा   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरका अपशकुन देखना, यादवोंके विनाशका समाचार सुनना, द्वारकामें ऋषियोंके शापवश साम्बके पेटसे मूसलकी उत्पत्ति तथा मदिराके निषेधकी कठोर आज्ञा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  16.1.4 
आदित्यो रजसा राजन् समवच्छन्नमण्डल:।
विरश्मिरुदये नित्यं कबन्धै: समदृश्यत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! सौरमंडल धूल से ढका हुआ था। सूर्योदय के समय सूर्य प्रकाशहीन प्रतीत होता था और उसका गोला प्रतिदिन अनेक सिरहीन पिंडों से ढका हुआ प्रतीत होता था।
 
King! The solar system was covered with dust. At sunrise the sun appeared to be without any light and its sphere appeared to be covered with many headless bodies every day.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)