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mahabharat 16.1.28-30h: हे मनुष्यों के स्वामी! राजा की आज्ञा से उसके सेवकों ने उस लौह चूर्ण को समुद्र में फेंक दिया। फिर उग्रसेन, श्रीकृष्ण, बलराम और महामना बभ्रु की आज्ञा से राजा के सेवकों ने नगर में घोषणा करवा दी कि 'आज से नगर का कोई भी निवासी वृष्णिवंशी और अंधकवंशी क्षत्रियों के घर मदिरा न बनाए।' 28-29 1/2।   |   mahabharat अध्याय 16.1: युधिष्ठिरका अपशकुन देखना, यादवोंके विनाशका समाचार सुनना, द्वारकामें ऋषियोंके शापवश साम्बके पेटसे मूसलकी उत्पत्ति तथा मदिराके निषेधकी कठोर आज्ञा   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरका अपशकुन देखना, यादवोंके विनाशका समाचार सुनना, द्वारकामें ऋषियोंके शापवश साम्बके पेटसे मूसलकी उत्पत्ति तथा मदिराके निषेधकी कठोर आज्ञा  »  श्लोक 28-30h
 
 
श्लोक  16.1.28-30h 
तच्चूर्णं सागरे चापि प्राक्षिपन् पुरुषा नृप।
अघोषयंश्च नगरे वचनादाहुकस्य ते॥ २८॥
जनार्दनस्य रामस्य बभ्रोश्चैव महात्मन:।
अद्यप्रभृति सर्वेषु वृष्ण्यन्धककुलेष्विह॥ २९॥
सुरासवो न कर्तव्य: सर्वैर्नगरवासिभि:।
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! राजा की आज्ञा से उसके सेवकों ने उस लौह चूर्ण को समुद्र में फेंक दिया। फिर उग्रसेन, श्रीकृष्ण, बलराम और महामना बभ्रु की आज्ञा से राजा के सेवकों ने नगर में घोषणा करवा दी कि 'आज से नगर का कोई भी निवासी वृष्णिवंशी और अंधकवंशी क्षत्रियों के घर मदिरा न बनाए।' 28-29 1/2।
 
O Lord of men! By the king's order, his servants threw that iron powder into the sea. Then, by the order of Ugrasen, Shri Krishna, Balarama and Mahamana Babhru, the king's men made an announcement in the city that 'From today onwards, no resident of the city should prepare wine at the houses of all the Vrishnivanshi and Andhakvanshi Kshatriyas. 28-29 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)