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mahabharat 15.8.6: जब वे वहाँ बैठे हुए थे, तब काल को जानने वाली और प्रजापति के समान गुणवान पुण्यात्मा गान्धारी देवी ने अपने पति से इस प्रकार पूछा ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 15.8: धृतराष्ट्रका कुरुजांगलदेशकी प्रजासे वनमें जानेके लिये आज्ञा माँगना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 8: धृतराष्ट्रका कुरुजांगलदेशकी प्रजासे वनमें जानेके लिये आज्ञा माँगना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  15.8.6 
तमासनगतं देवी गान्धारी धर्मचारिणी।
उवाच काले कालज्ञा प्रजापतिसमं पतिम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जब वे वहाँ बैठे हुए थे, तब काल को जानने वाली और प्रजापति के समान गुणवान पुण्यात्मा गान्धारी देवी ने अपने पति से इस प्रकार पूछा ॥6॥
 
When he was seated there, the virtuous Gandhari Devi, who had knowledge of the times and was also like Prajapati, asked her husband thus:॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)