श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 8: धृतराष्ट्रका कुरुजांगलदेशकी प्रजासे वनमें जानेके लिये आज्ञा माँगना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  15.8.23 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा सर्वे ते कुरुजाङ्गला:।
बाष्पसंदिग्धया वाचा रुरुदुर्भरतर्षभ॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! राजा धृतराष्ट्र के ये वचन सुनकर कुरुजाङ्गल में उपस्थित समस्त लोग अत्यन्त विलाप करने लगे॥ 23॥
 
O best of the Bharatas! On hearing these words of King Dhritarashtra, all the people present in the Kurujangala present there started crying profusely.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)