श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 8: धृतराष्ट्रका कुरुजांगलदेशकी प्रजासे वनमें जानेके लिये आज्ञा माँगना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  15.8.16-17h 
यदिदानीमहं ब्रूयामस्मिन् काल उपस्थिते॥ १६॥
तथा भवद्भि: कर्तव्यमविचार्य वचो मम।
 
 
अनुवाद
इस अवसर पर मैं जो कुछ भी आपसे कहूँ, उसे आप बिना किसी संकोच के स्वीकार करें, यही मेरी प्रार्थना है॥16 1/2॥
 
Whatever I say to you on this occasion, please accept it without any hesitation; this is my prayer.॥ 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)