Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.5.28-29h: भरतपुत्र युधिष्ठिर! आपको ऐसा कानून बनाना चाहिए कि आपके द्वारा नियुक्त न्यायाधीश अपराध की सीमा जानकर दण्ड के पात्र व्यक्तियों को उचित दण्ड दें। | mahabharat अध्याय 15.5: धृतराष्ट्रके द्वारा युधिष्ठिरको राजनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परिमाणं विदित्वा च दण्डं दण्डॺेषु भारत॥ २८॥
प्रणयेयुर्यथान्यायं पुरुषास्ते युधिष्ठिर।
अनुवाद
भरतपुत्र युधिष्ठिर! आपको ऐसा कानून बनाना चाहिए कि आपके द्वारा नियुक्त न्यायाधीश अपराध की सीमा जानकर दण्ड के पात्र व्यक्तियों को उचित दण्ड दें।
Yudhishthira, son of Bharata! You should make such a law that the judges appointed by you should give appropriate punishment to those who deserve punishment after knowing the extent of the crime.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥