vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व
»
अध्याय 4: व्यासजीके समझानेसे युधिष्ठिरका धृतराष्ट्रको वनमें जानेके लिये अनुमति देना
»
श्लोक 1
श्लोक
15.4.1
व्यास उवाच
युधिष्ठिर महाबाहो यथाह कुरुनन्दन:।
धृतराष्ट्रो महातेजास्तत् कुरुष्वाविचारयन्॥ १॥
अनुवाद
व्यासजी बोले, 'हे महाबाहु युधिष्ठिर! कुरुवंश को आनन्द प्रदान करने वाले महाबली धृतराष्ट्र जो कुछ कह रहे हैं, उसे बिना विचारे ही करो।'
Vyasa said, 'O mighty-armed Yudhishthira! Whatever the mighty Dhritarashtra, who has brought joy to the Kuru clan, is saying, do it without thinking.'
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas