श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 39: राजा युधिष्ठिरद्वारा धृतराष्ट्र, गान्धारी और कुन्ती—इन तीनोंकी हड्डियोंको गङ्गामें प्रवाहित कराना तथा श्राद्धकर्म करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  15.39.7 
एवं स्वेनाग्निना राजा समायुक्तो महीपते।
मा शोचिथास्त्वं नृपतिं गत: स परमां गतिम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! इस प्रकार राजा धृतराष्ट्र अपनी ही अग्नि से जलकर भस्म हो गए हैं, आपको उस राजा के लिए शोक नहीं करना चाहिए। उन्होंने उत्तम गति प्राप्त कर ली है॥7॥
 
Prithvinath! In this way King Dhritarashtra has been burnt by his own fire, you should not grieve for that king. He has attained the best state. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)