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श्लोक 15.39.4  |
स विवृद्धस्तदा वह्निर्वने तस्मिन्नभूत् किल।
तेन तद् वनमादीप्तमिति ते तापसाब्रुवन्॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| कहते हैं कि वही अग्नि बढ़कर सम्पूर्ण वन में फैल गई और सब कुछ जलाकर राख कर दिया - ऐसा वहाँ के तपस्वियों ने मुझे बताया ॥4॥ |
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| It is said that the same fire grew and spread throughout the forest and burnt it all to ashes - the ascetics there told me this. ॥ 4॥ |
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